कुछ ख़याल

बड़े दिनों बाद आज आई है उन्हें याद हमारी
वरना हम ही थे जो फ़ुर्सत से उनकी यादों को
दिल से लगाए बैठे रहते थे.

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कहीं ना कहीं कोई तो ऐसा होगा जो
मुझे खोने से डरता होगा.

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चाहे कितने भी आईने रख दो उनके सामने
पर सच्चाई तो उनकी आँखों में ही नज़र आती है.

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कुछ और पल रुका था वो आज मेरे पास
शायद उसे भी मेरा साथ अब अच्छा लगने लगा है.

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दिल से कोशिश की थी मैने उसे मानने की
और उसने कोशिश की थी मेरी
हर कोशिश को आज़माने की.

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शब्द तो बहुत है मेरे शब्दकोश में
पर तुम्हारे दिल तक पहुंच सके ऐसे शब्द कम हैं.

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उलझे रहे ज़िंदगी के सवालों में सारी उम्र
सुलझे भी तो उस एक पल में.

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चलो फिर से मिलकर कुछ सुकून भरे पल  ढूंढते  है
शायद इस बार हमारी कोशिशें काम कर जाएँ.

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बस अब इतनी सी रह गई है ये कहानी
एक था वो और एक थे हम.

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फिर से लौट आया है
वही  जाना-पहचाना दर्द
पल पल बढ़ती बेचैनी
और
हर सुकून भरी नींद के साथ
बढ़ता ख्वाहिशों का बोझ.

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फिर से रहने लगा है मेरे कमरे में वही अँधेरा
जो कभी थोडा तेरा था तो और कभी थोडा मेरा.

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