छोटी आँखें, ख़्वाब बड़े

बॉम्बे बड़ी ही अज़ीब नगरी हैं,
सपनों की यहाँ भरमार है पर अपने बेचारे लाचार हैं.
जब जग सोता, यहाँ जागने का दस्तूर है.
चलता नहीं कोई यहाँ, सब साले दौड़ लगाते हैं,
कभी नेम, कभी फेम, कभी पैसा,
कभी ऐसा या वैसा के नशे में धुत होकर गश्त खाते हैं.
ट्रेन की पटरी शहर की लाइफ्लाइन हैं,
पर पैदल चलने वालों पर किस्मत का फाइन है.
सम्भल-सम्भल के चलते हैं,
डर डर के उड़ते हैं,
यहाँ सभी बैठे-बैठे दुनिया के चक्कर लगाते हैं.
बड़ी ही अज़ीब नगरी है बॉम्बे.

इसी अज़ीब नगरी में ट्रेन और बस अगर छूट जाये तो सिर्फ़ ऑटो ही आपकी नैया पार लगा सकता है, वैसे टॅक्सी भी है, पर अब सभी तो टॅक्सी अफोर्ड नहीं कर सकते ना. वैसे इस नगरी में ऑटो के लिए भी खासी मेहनत करनी पड़ती है, अगर आप अंधेरी ईस्ट में हैं तो दोस्तों समझ लो तकरीबन ३० मिनट आपको इंतज़ार करना ही होगा और हो सकता है उसके बाद भी संभावना हैं आपको जहाँ जाना है, वहाँ ऑटो वाला ना जाना चाहता हो, फिर क्या लग जाएँ वापस से लाइन में और करें दूसरे ऑटो का वेट. कुछ इसी तरह इंतज़ार करते-करते मेरी मुलाकात हुई एक कहानी से, उसी काल्पनिक कहानी में दो ऑटोवालों की आपसी बातचीत के कुछ दृश्य आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ

रमेश: यार बहुत दिन हुए साला लाइफ में कुछ ख़ास नहीं किया.

बिज़्जु: क्या करना है बे साले तुझे ख़ास.

रमेश: कुछ तो करना है, पर क्या करें समझ नहीं आ रहा है.

बिज़्जु थोड़ा मजाकिया अंदाज़ में बोलता है: एक काम कर भाभी को घर वापस ले आ.

रमेश थोड़ा बिगड़ते हुए: तुम्हारे जैसे कमीने दोस्त हों तो दुश्मनों की क्या ज़रूरत.

बिज़्जु: अरे मज़ाक कर रहा हूँ, नाराज़ काइ को होता.

रमेश: चल छोड़ अब बता क्या करें, कुछ अलग, थोड़ा डिफरेंट, अपुन को भी साला फेमस होने का है, ऐसा के लोग बोले वो देख रमेश जा रेला है, रमेश ऑटो वाला.

बिज़्जु: भाई तेरा बज़ट कितना है और ख़्वाब कितनी बड़ी कीमत के देख रहा है.

रमेश: अबे ख़्वाब देखने पे गवर्नमेंट ने कोई टॅक्स लगाया क्या, जो ना देखूं.

बिज़्जु: तेरेको पता ना, अपना बापू अपन लोग को हमेशा बोलता था, जितना लंबी चादर है, पैर उतने ही लंबा करने का. अगर ज़्यादा लंबा किया तो ना चादर रहती और ना छत.

रमेश: कुछ भी बोलता, तेरा बापू क्या कोई भविष्यवाणी किया क्या?

बिज़्जु: देख तू बापू के बारे में कुछ नहीं बोलने का.

रमेश: चल, सॉरी बोलता है, पता है अपुन का दिमाग़ और दिल क्या बोलता है.

बिज़्जु: बोल, में ना बोलेगा फिर भी तू बताए बिना तो मानने वाला नहीं, बोल दे.

रमेश: अपुन का दिमाग़ बोलता, कुछ करने के लिए पैसा नहीं सिर्फ़ एक आइडिया माँगता और अपुन का दिल बोलता अगर चादर छोटी हैं, तो चादर बदल दे पर अपने पैर ज़रूर फ़ैलाने का.

बिज़्जु: काइ को तू फोकट की बात करता, कभी तू सुना छोटी-छोटी आँखों में बड़े सपने समाए हैं, किसी के.

रमेश: समाए हैं, कितने लोग हुए इस नगरी में बस कुछ सपने लेके आए और पा गये अपने ख़्वाबों का जहाँ.

बिज़्जु: कौन सी बकवास पिक्चर का डाइलॉग है और तेर को कौन बोला हर वो बंदा जो सपने लेकर आया, इधर आके बड़ा बना. तेरे को पता ना वो अपना रईस, इधर हीरो बनने को आया था, अभी अपने जैसे ऑटो चलाता और खुश रहता. और वो पता अभी कुछ दिन पहले अपनो को वो मिला था ना, झोला लटकाके, लंबी दाढ़ी रखके घूमता, पिछले ५ साल से इधर उधर चक्कर लगाता, तेरे को यह भूत कौन चड़ाया के कुछ भी सोच लो और कुछ भी कर लो.

रमेश: अबे तू रेन दे, तेरे समझ नि आने वाला, अपुन को हीरो वीरो थोड़ी बनने का है, अपुन तो फेमस होने की बात कर रिया है और तेरे को क्या लगता सिर्फ़ हीरो लोग फेमस है क्या. अख़बार नी पड़ता तू, लोग क्या क्या करके फेमस हो जाते. में भी करेगा कुछ हटके, एकदम यूनीक और हो जाएगा फेमस.

बिज़्जु: तू भी बड़ी फिलिम है भाई, तेरे को पता भी है तू बोल क्या रिया है.

चल बता तू करेगा क्या, और कैसे होगा फेमस.

रमेश: अपुन ने कुछ सोचा है.

बिज़्जु: क्या सोचा बता ज़रा, मेर को भी तो पता चले कैसे होयगा तू फेमस.

रमेश: अपुन सोचा, अपुन अपना ऑटो एकदम हाइटेक करेगा, इसमे एसी लगाएगा, चार्जिंग पॉइंट, मॅगज़ीन रखेगा, और अगर लोगों को बॅटरी ख़तम हुआ या बॅलेन्स ख़तम हुआ, तो वो फेसिलिटी भी देगा.

बिज़्जु: बस

रमेश: नहीं रे, और भी है और ना अपुन लोगो से इंग्लीश में बात करेगा, उनसे शेयर मार्केट, बिज़्नेस, पॉलिटिक्स, करप्शन सब पे बात करेगा. साथ में अपुन के ऑटो में एक छोटा सा सेक्शन होयगा, जिसमे इंडिया टुडे, फॉर्ब्स जैसा बड़ा-बड़ा मॅगज़ीन रखेगा. और ना घर से पिक-उप ड्रॉप फेसिलिटी के साथ मन्थ्ली डिसकाउंट भी देगा.

बिज़्जु: बाकी सब ठीक है, पर तू डिसकाउंट नी देने का, नहीं तो यूनियन तेरा लाइसेन्स जप्त कर लेगा, समझा क्या.

रमेश: तो कैसा लगा अपुन का फेमस होने का प्लान.

बिज़्जु थोड़े मजाकिया अंदाज़ में: एकदम झकास बोस.

दोनो की बातचीत में थोड़ा अंतराल डालते हुए, एक सवारी आकर पूछती हैं, भैया बांद्रा चलोगे क्या.

बिज़्जु: हां जायगा ना मेडम. रमेश जा अभी सवारी लेकर जा, अपुन फेमस कल होयगा.

रमेश थोड़ा मुस्कुराते हुए, बैठिए मेडम.

रमेश ऑटो स्टार्ट करता है और मेडम को बांद्रा के लिए लेकर निकल जाता है अपनी आँखों में कई ख़्वाब बसाए, जिनके लिए उसे बेन्तेहा कोशिश और बेशुमार मेहनत करना है, आज या कल से नहीं, आज और अभी इसी वक़्त से.

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