Break up

निशांत: यार अब कुछ बोलना है या भी नहीं, या सारी शाम ऐसे ही बैठे रहना है.

रिया ने आँखें झपकाई पर कुछ जवाब नहीं दिया, वो अपने ही ख़यालों में खोई हुई है.

निशांत: हेलो मेडम, तुम मुझे सुन भी रही हो या नहीं.

रिया: सॉरी, क्या बोल रहे थे तुम.

निशांत: यार हम इतनी देर से यहाँ बैठे हैं, और तुम हो के कुछ बोलती ही नहीं.

रिया: वैसे भी तुम कौन सी मेरी बात सुनते हो.

निशांत: हेलो इक्स्क्यूज़ मी, तुम कहना क्या चाहती हो, में कभी तुम्हारी बात नहीं सुनता.

रिया: हाँ कभी नहीं.

निशांत ये सुनकर थोड़ा गुस्सा होता है, मगर अपने आप को शांत करके बोलता है.

निशांत: तो तुम चाहती क्या हो, आज साफ-साफ बता दो.

रिया: में तुमसे कुछ नहीं चाहती, तुम अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से जियो और मुझे अपने तरीके से जीने दो.

निशांत: ओह हेलो, वैसे मैने तुम्हे कब किसी चीज़ के लिए रोका.

रिया: रोका तो नहीं मगर, तुमने सोचा तो कई बार होगा. वैसे भी तुम्हे मेरा दोस्तों के साथ घूमना, पार्टी करना, टूर्स पर जाना कभी पसंद नहीं था. मुझे पता है तुम कितनी बार बोलना चाहते थे, पर बोला नहीं.

निशांत: अरे यार, तुम किस बात को कहाँ से कहाँ लेकर जा रही हो. और वैसे यह सब डिस्कस करने के लिए बुलाया था तुमने मुझे. तुम्हे पता है ना आज मेरी कितनी ज़रूरी मीटिंग थी, जिसे में बीच में हो छोड़कर आया हूँ.

रिया: वैसे भी तुम्हारी हर मीटिंग मुझसे ज़्यादा इम्पॉर्टन्ट होती है. मेरी फीलिंग्स की कोई परवाह ही नहीं हैं तुम्हे.

निशांत: डोंट बी रिडिक्यलस, तुम्हे भी पता है यह सही नहीं.

कुछ पल के दोनो शांत हो जाते हैं, सिर्फ़ एक दूसरे की नज़रों में देखते रहते हैं. इसी बीच वेटर कॉफी लेकर आता है और दोनों के बीच खलल डाल देता है.

निशांत: कॉफी पी लो नहीं तो ठंडी हो जाएगी, और तुम्हे ठंडी कॉफी पसंद नहीं.

रिया: तुम्हे कब से इसकी परवाह होने लगी.

निशांत: कमऑन यार-गिव-मी-ए-ब्रेक. तुम आख़िर चाहती क्या हो.

रिया: जैसे तुम्हे पता नहीं.

निशांत: नहीं पता, इसीलिए पूछ रहा हूँ, अब तुम्हे तकलीफ़ ना हो तो बता दो.

रिया: मुझे ये रिश्ता ख़तम करना है.

निशांत दो मिनिट तक यूँ ही बैठा रहता है उसे समझ ही नहीं आ रहा, आख़िर बोले तो क्या बोले, बस यूँ ही चुपचाप बैठा हुआ है.

रिया: ओ हलो

निशांत को जैसे किसी सपने से जगाकर हक़ीकत में ला खड़ा कर दिया हो.

निशांत: पर अचानक से क्या हुआ है तुम्हे, जब से बकवास कर रही हो, और अब ब्रेकप. तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है ना.

रिया: माइंड युवर लॅंग्वेज, मिस्टर.

निशांत: सॉरी बट यार, हमारा पाँच साल का रिश्ता है, उसे ऐसे कैसे एक झटके में ख़तम कर रही हो. हाँ मैं मानता हूँ हमारे रिश्ते में थोड़ी प्रॉब्लम्स हैं, किस रिश्ते में नहीं होती, उसका ये मतलब नहीं की बस ऐसे ही किसी रिश्ते को ख़तम कर दो. कमऑन यार, लेट’स गिव इट वन मोर चान्स.

रिया: नहीं, यू डोंट डिज़र्व सेकेंड चान्स.

निशांत: समझने की कोशिश करो यार, वी विल मेक इट वर्क दिस टाइम.

रिया: नो, इट’स नोट पॉसिबल.

निशांत: ठीक है अब इसका इल्ज़ाम भी मुझ पर ही लगा देना की मैने हमारे रिश्ते को बचाने की कोशिश भी नहीं की. फीलिंग्स की बात करती हो, मुझ तो लगता है तुम्हे फीलिंग्स का मतलब भी नहीं पता.

रिया: बकवास बंद करो

निशांत: अब तुम्हे मेरी बातें बकवास लग रही हैं.

रिया: मैं तुमसे बहस नहीं करना चाहती, जो कुछ था वो ख़तम, और आज के बाद मुझसे मिलने की कोशिश मत करना. और हाँ ग़लती से भी कभी मुझे फोन मत करना.

निशांत थोड़े गुस्से में, ये लो तुम्हारे सामने ही फोन से तुम्हारा नंबर डीलीट कर देता हूँ. अब ख़ुश.

रिया: बहुत ज़्यादा.

निशांत: ओके बाइ, और आगे से तुम भी मुझे अपनी सूरत मत दिखाना.

निशांत वही बैठा रहता है कुछ देर, अपने ही ख़यालों में खोया हुआ, फिर उठकर चला जाता है.

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